मौन है हिंदुस्तानी (v2)
मौन है हिंदुस्तानी (v2)
Tunely V1Original
[Intro]
हम लोगों को समझ रखा है तुमने कबूतर जानी
सच की उड़ान रोक न पाएगी कोई कहानी
[Verse 1]
ऐसा ना हो इस ego में खो बैठो राजधानी
कुर्सी की धूल में दब जाए जनता की जुबानी
झाड़ चने पे कमल का राजा, गोद में EVM रानी
गिनती के खेल में मत भूलो, खेतों की वीरानी
बागी जनता उनतीस में ना कर दे खत्म कहानी
गली-गली में सवाल खड़े, आँखों में निगरानी
वादों की थाली खाली निकली, भाषण भारी-भारी
मौन है हिंदुस्तानी, लेकिन मूर्ख नहीं है जानी
मौन है हिंदुस्तानी, लेकिन मूर्ख नहीं है जानी
कागज़ पर जो रंग भरो, धरती पूछे निशानी
मौन है हिंदुस्तानी, लेकिन मूर्ख नहीं है जानी
[Verse 2]
माना मंदिर बनवाना पुण्य कर्म है
पर भक्तों की सुध लेना राजधर्म है
भूखे बच्चे, सूखी फसल, किसका ये मर्म है?
सिंहासन ऊँचा हो तो नीचे देखना धर्म है
वोटर हवा में ज़हर फेंके, क्या ये नई रवानी?
जुमले सुन-सुन के थक गई जनता सयानी
नल में पानी, खेत में दाम, अस्पताल में दवा दे
फिर मंचों पर बोलो राजा, जनता को हिसाब दे
[Bridge]
ना डर से, ना लालच से, अब बात खुलेगी
हर बंद दरवाज़े पर दस्तक जनता देगी
जो चुप है वो सोया नहीं, वक्त लिख रहा है
सत्ता का हर आईना चेहरा दिखा रहा है
[Chorus]
मौन है हिंदुस्तानी, लेकिन मूर्ख नहीं है जानी
मौन है हिंदुस्तानी, लेकिन मूर्ख नहीं है जानी
कुर्सी चाहे जिसकी हो, जनता सबसे सयानी
मौन है हिंदुस्तानी, लेकिन मूर्ख नहीं है जानी
[Outro]
राजधानी याद रख, ये मिट्टी बोलती है
खामोशी के भीतर भी जनता डोलती है
हम लोगों को समझ रखा है तुमने कबूतर जानी
अब सच की उड़ान लिखेगी अपनी नई कहानी
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Original · 2:46 · Créée sur Tunely
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