energetic pop-punk, male vocals
नक्शे के पार — नई राहें
[Intro]
ओ... ओ...
चल पड़ा हूँ आज...
जहाँ रास्ते खुद मंज़िल बन जाएँ...
[Verse 1]
डैशबोर्ड पर धूल है, पीछे रखा सामान,
एक ही गोल रास्ते में थक गई है जान।
आसमान को देखकर, किसी इशारे का इंतज़ार,
पर अंदर की आवाज़ सुन रहा हूँ अबकी बार।
वो कहती है, उठो, सुबह तुम्हें बुला रही,
ठंडी-ठंडी हवा नई राह दिखा रही।
क्यों रुकना है अब, जब दिल में है पुकार,
आज अपनी ही धुन पर चलना है इस बार।
[Pre-Chorus]
अब हवाएँ तेज़ होने लगी हैं,
मेरी रगों में जोश भरने लगी हैं।
मैं परछाइयों को पीछे छोड़ रहा हूँ,
अनजान मंज़िलों की ओर खुद को मोड़ रहा हूँ।
[Chorus]
मैं आज नक्शे की हदों के पार जा रहा हूँ,
सारे पुराने बहानों को हवा में उड़ा रहा हूँ।
पहियों को घूमने दो, इंजन को दहाड़ने दो,
मुझे पहले जैसा अब बिल्कुल नहीं रहना है।
मैं सूरज की लालिमा का पीछा कर रहा हूँ,
ये खुली सड़क ही मेरी मंज़िल, कह रहा हूँ।
हाँ, ये खुली सड़क ही मेरी मंज़िल है,
आज खुद को फिर से पा रहा हूँ।
[Verse 2]
शहर की हदों को शीशे में पीछे छोड़ आया,
पुरानी भारी यादों से नाता तोड़ आया।
जेबें मेरी खाली हैं, पर दिल में एक आग है,
बिजली के तारों पर टंगे मेरे ख्वाब हैं।
हर मील का पत्थर नई शुरुआत है,
इस सफर की धड़कन में अलग ही बात है।
जो खो गया था, उसे पीछे रहने दो,
नई सुबह को अब सामने आने दो।
[Pre-Chorus]
अब हवाएँ तेज़ होने लगी हैं,
मेरी रगों में जोश भरने लगी हैं।
मैं परछाइयों को पीछे छोड़ रहा हूँ,
अनजान मंज़िलों की ओर खुद को मोड़ रहा हूँ।
[Chorus]
मैं आज नक्शे की हदों के पार जा रहा हूँ,
सारे पुराने बहानों को हवा में उड़ा रहा हूँ।
पहियों को घूमने दो, इंजन को दहाड़ने दो,
मुझे पहले जैसा अब बिल्कुल नहीं रहना है।
मैं सूरज की लालिमा का पीछा कर रहा हूँ,
ये खुली सड़क ही मेरी मंज़िल, कह रहा हूँ।
हाँ, ये खुली सड़क ही मेरी मंज़िल है,
आज खुद को फिर से पा रहा हूँ।
[Bridge]
लोग कहते थे, मैं दूर तक नहीं जा पाऊँगा,
तारों के टूटने का इंतज़ार करता रह जाऊँगा।
पर अब स्टीयरिंग और चाबी दोनों मेरे हाथ में हैं,
मेरी ज़िंदगी की राहें अब मेरे साथ में हैं।
अब डर नहीं, अब कोई रोक नहीं,
पीछे मुड़ने की कोई बात नहीं।
जो सपना देखा था, उसे जीना है आज,
अपनी कहानी लिखनी है आज।
[Final Chorus]
मैं आज नक्शे की हदों के पार जा रहा हूँ,
हर बंद दरवाज़े को पीछे छोड़ता जा रहा हूँ।
पहियों को घूमने दो, इंजन को दहाड़ने दो,
मुझे पहले जैसा अब बिल्कुल नहीं रहना है।
मैं सूरज की लालिमा का पीछा कर रहा हूँ,
ये खुली सड़क ही मेरी मंज़िल, कह रहा हूँ।
जहाँ रास्ते खत्म हों, वहीं राह बनाऊँगा,
मैं अपनी दुनिया खुद बनाऊँगा।
[Outro]
ओ... ओ...
नक्शे के पार...
नई राहों के साथ...
अब कोई वापसी नहीं...
मैं हदों के पार हूँ...
और सफर अभी बाकी है...
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